सोहराई कला के संरक्षण और जनजातीय उद्यमिता को मिलेगा नया आयाम, एसएसएलएनटी महाविद्यालय व मां प्रेमा फाउंडेशन के बीच एमओयू
- शोध, प्रशिक्षण, डिजिटल दस्तावेजीकरण और बाजार से जोड़ने पर होगा संयुक्त कार्य
- छात्राओं को मिलेगा फील्ड रिसर्च, इंटर्नशिप और जनजातीय कला के संरक्षण का अवसर
धनबाद। झारखंड की समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एसएसएलएनटी महिला महाविद्यालय, धनबाद ने महत्वपूर्ण पहल की है। महाविद्यालय ने जनजातीय कला, विशेषकर सोहराई पेंटिंग के संरक्षण, शोध, प्रशिक्षण और कलाकारों के आर्थिक सशक्तीकरण के उद्देश्य से मां प्रेमा फाउंडेशन, पटना के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के माध्यम से छात्राओं को जनजातीय कला एवं संस्कृति पर शोध, व्यावहारिक प्रशिक्षण और सामुदायिक सहभागिता के नए अवसर उपलब्ध होंगे, वहीं पारंपरिक कलाकारों को आधुनिक बाजार और डिजिटल प्लेटफार्म से जोड़ने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
एमओयू के तहत दोनों संस्थान सोहराई पेंटिंग सहित जनजातीय कला एवं संस्कृति पर संयुक्त शोध परियोजनाएं संचालित करेंगे। इसके अलावा सांस्कृतिक अध्ययन, केस स्टडी, डिजिटल अभिलेखीकरण, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सेमिनारों और सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। छात्राओं को जनजातीय समुदायों के बीच जाकर फील्ड स्टडी, इंटर्नशिप और लाइव प्रोजेक्ट्स में भाग लेने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी अकादमिक समझ के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी समृद्ध होगा।
कौशल विकास, सेमिनार व ई-कामर्स प्लेटफार्म से जोड़ने की होगी कवायद
समझौते का एक प्रमुख उद्देश्य जनजातीय कलाकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है। इसके तहत कलाकारों को कौशल विकास प्रशिक्षण, उत्पादों की ब्रांडिंग, विपणन, प्रदर्शनियों, कला मेलों, व्यापारिक आयोजनों तथा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। इससे पारंपरिक सोहराई कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी तथा कलाकारों की आय और रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शर्मिला रानी ने कहा कि यह एमओयू केवल एक औपचारिक समझौता नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और समाज को जोड़ने वाली एक सार्थक पहल है। उन्होंने कहा कि छात्राओं को जनजातीय कला और संस्कृति के संरक्षण के साथ शोध, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में कार्य करने का अवसर मिलेगा। इससे उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता, कौशल विकास और रोजगार क्षमता में भी वृद्धि होगी।
झारखंड की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने की आवश्यकता
मां प्रेमा फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी (सीईओ) ज्योति ने कहा कि सोहराई पेंटिंग झारखंड की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे वैश्विक पहचान दिलाने की आवश्यकता है। फाउंडेशन लंबे समय से जनजातीय कलाकारों के संरक्षण, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है।
एसएसएलएनटी महिला महाविद्यालय के साथ यह साझेदारी शोध, नवाचार और सामुदायिक विकास के नए आयाम स्थापित करेगी। एमओयू के तहत अतिथि व्याख्यान, छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान, संयुक्त शोध प्रकाशन तथा सामुदायिक विकास कार्यक्रमों का भी संचालन करेंगे। साथ ही जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सोहराई कला का डिजिटल दस्तावेजीकरण कर भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। दोनों पक्षों ने विश्वास जताया कि यह सहयोग शिक्षा, संस्कृति, शोध और जनजातीय उद्यमिता को नई दिशा देने के साथ-साथ झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
